
रोज़ फ़लक से नम बरसेंगे
प्यार के बादल कम बरसेंगे
मौत ने आँचल जब लहराया
आँगन में मातम बरसेंगे
क़तरा क़तरा ख़ून का बन कर
इस धरती पर हम बरसेंगे
ज़ुल्फ़ खुलेगी पुर्वाई क
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रोज़ फ़लक से नम बरसेंगे
प्यार के बादल कम बरसेंगे
मौत ने आँचल जब लहराया
आँगन में मातम बरसेंगे
क़तरा क़तरा ख़ून का बन कर
इस धरती पर हम बरसेंगे
ज़ुल्फ़ खुलेगी पुर्वाई क