रेत का समंदर's image
701K

रेत का समंदर

रेत का समंदर में वो कुछ ढूंढते रहे हवा के थपेड़ो में कोई लफ्ज़ था जो न मिला, बाजार में निकल कर भी, निगाहें तलाशती रही, हम भी समझ न पाए, वो कौन था जो न मिला जो सीधा रास्ता था अब टेढ़ा- मेढ़ा हो चला जिससे कुछ वास्ता था वो अपने रास्ते चला फिर भी ज़ारी है तलाश, निगाह से, आह से समझ आता है रिश्ता उनके दिल के पनाह से बदल सा गया है वो, मुझे भी नही पहचानता शायद मेरा चहरा कुछ पुराना सा हो चला लेकिन जिस राह
Read More! Earn More! Learn More!