रख हथेलियों पर अपने सपनों को... उड़ा दूँ आसमानों में.. बादलों की शक्ल दूँ स्वच्छंद उड़ें वो हवा के बहाव में। लौटें शाम को.. फिर से, मेरी हथेलियों पर वापस। सूरज की लालिमा ओढ़े, सुर्ख़ रंगों से सरोबार। मुझे अपना रंग देने.... एक नया जीवन देने।