पुरानी यादों को आज जगाना चाहता हूँ आज फिर उन गलियों में मैं जाना चाहता हूँ चढ़ना चाहता हूँ आज फिर मैं पेड़ पर किसी तोड़ कर अमरूद मैं भाग जाना चाहता हूँ याद वो यादों मे कहीं छुपी बैठी है आज भी पहन कर नये नये कपड़े मैं इतराना चाहता हूँ करूँ ग़लती मैं तो बचूँ कैसे बस ये ही सोचता आज नाम किसी और का मैं लगाना चाहता हूँ बन ठन कर निकलूँ मैं घर से बना कर कोई प्लान दोस्तों के साथ स्टूडीओ में मैं फ़ोटो खिंचवाना चाहता हूँ वो भी क्या दिन थे जब हम बुद्धू थे बहुत बड़े अकेले घर में दोस्तों के साथ बियर में मैं पानी मिलाना चाहता हूँ कोशिश करता आज नोट तो जाते नहीं गुल्लकों में कोई जेब ख़र्च दे २५/५० पैसे मैं गुल्लक भरना चाहता हूँ जवानी की आस लिये बचपन गुज़र गया जाने कब जवानी में आज फिर मैं वापस वो बचपन पाना चाहता हूँ