सारा शहर छान डालने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुँचा कि इस इतने बड़े शहर में मेरी सबसे बड़ी पूँजी है मेरी चलती हुई साँस मेरी छाती में बंद मेरी छोटी-सी पूँजी जिसे रोज मैं थोड़ा-थोड़ा खर्च कर देता हूँ क्यों न ऐसा हो कि एक दिन उठूँ और वह जो भूरा-भूरा-सा एक जनबैंक है- इस शहर के आखिरी छोर पर- वहाँ जमा कर आऊँ सोचता हूँ वहाँ से जो मिलेगा ब्याज उस पर जी लूँगा ठाट से कई-कई जीवन