प्रीतम जुनि जाऊ परदेश । ई हेमन्त में एकसर गेने पाएब परम कलेश ॥ शीत निवारण कारण अछि जे सुन्दर सब उपचार । से सब कतए अहाँ के भेटत भेने घरक बहार ॥ नीक भवन भोजन समयोचित ओढ़ना गरम बिछौना । अपन नारि केर हृदय लागि कए सुख सँ सूतब कोना ॥ भल नहि एखन भूमि पर सुति कँ पूसक राति बिताएब । सूनू कहल ‘सरोज’ हमर सुख घरहि मध्य सब पाएब ॥ प्रीतम जुनि जाऊ परदेश ॥