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प्रकाश हास - चन्द्रकुंवर बर्त्वाल

किस प्रकाश का हास तुम्हारे मुख पर छाया तरुण तपस्वी तुमने किसका दर्शन पाया ? सुख-दुख में हँसना ही किसने तुम्हे सिखाया किसने छूकर तुम्हें स्वच्छ निष्पाप बनाया ? फैला चारों ओर तुम्हारे घन सूनापन सूने पर्वत चारों ओर खड़े, सूने घन । विचर रहे सूने नभ में, पर तुम हँस-हँस कर ज
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