
किस प्रकाश का हास तुम्हारे मुख पर छाया
तरुण तपस्वी तुमने किसका दर्शन पाया ?
सुख-दुख में हँसना ही किसने तुम्हे सिखाया
किसने छूकर तुम्हें स्वच्छ निष्पाप बनाया ?
फैला चारों ओर तुम्हारे घन सूनापन
सूने पर्वत चारों ओर खड़े, सूने घन ।
विचर रहे सूने नभ में, पर तुम हँस-हँस कर
ज
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