फिक्र धुंआ धुआं जब तूने छुआ ये छुअन उन सपनों की है जो उड़ान को बेकल है फिक्र फक्र है जब तुम साथ हो गर पेशानी पर शिकन न हो तो मोहब्बत कैसी पंछी माफिक छोड़ना भी मोहब्बत है और एक मनचाही कैद भी कैद भी इतनी हसीन हुआ करती होगी महसूस हुआ जब तूने छुआ फिक्र धुंआ धुंआ