पथ में साँझ पहाड़ियाँ ऊपर पीछे अँके झरने का पुकारना । सीकरों की मेहराब की छाँव में छूटे हुए कुछ का ठुनकारना । एक ही धार में डूबते दो मनों का टकराकर दीठ निवारना । याद है : चूड़ी की टूक से चाँद पै तैरती आँख में आँख का ढारना ?