ओमक्षर अखिलाधार, जिसने जान लिया। एक, अखण्ड, अकाय, असंगी, अद्वितीय, अविकार, व्यापक, ब्रह्म, विशुद्ध विधाता, विश्व, विश्वभरतार- को पहचान लिया। भूतनाथ, भुवनेश, स्वयंभू, अभय, भावभण्डार, नित्य, निरंजन, न्यायनियन्ता, निर्गुण, निगमागार- मनु को मान लिया। करुणाकन्द, कृपालु, अकर्त्ता, कर्महीन करतार, परमानन्द, पयोधि, प्रतापी, पूरण, परमोदार- से सुखदान लिया। सत्य सनातन श्रीशंकर को समझा सबका सार, अपना जीवन-बेड़ा उसने भवसागर से पार- करना ठान लिया।