नवम्बर की दोपहर - धर्मवीर भारती's image
706K

नवम्बर की दोपहर - धर्मवीर भारती

अपने हलके-फुलके उड़ते स्पर्शों से मुझको छू जाती है जार्जेट के पीले पल्ले-सी यह दोपहर नवम्बर की ! आयी गयी ऋतुएँ पर वर्षों से ऐसी दोपहर नहीं आयी जो क्वाँरेपन के कच्चे छल्ले-सी इस मन की उँगली पर कस जाये और फिर कसी ही रहे नित प्रति बसी ही रहे, आँखों, बातों में, गीतों में आलिंगन में घायल फूलों की माला-सी वक्षों के बीच कसमसी ही रहे भीगे केशों में उलझे होंगे थके पंख सोने के हंसों-सी धूप यह नवम्बर की उस आँगन में
Read More! Earn More! Learn More!