मुन्नी से है अधिक चिबिल्ला, उसका प्यारा छोटा पिल्ला। मुन्नी के संग आता जाता, मुन्नी के संग दौड़ लगाता। मुन्नी को अम्मा समझाती, भला क्यों न तू पढ़ने जाती? पर मुन्नी कुछ ध्यान न देती। पिल्ले के संग वह चल देती। दोनो ही करते शैतानी, ऊब गई थी उनसे नानी। कहाँ गये वे पता न चलता, उन्हें खोजना माँ को खलता। खेत बाग वन ,नदि व नाले, दोनों ने थे देखे भाले। घर में वे न बैठते छिन भर, बस घूमा ही करते दिन भर। इससे अम्मा ने गुस्साकर, बन्द किया ताले के अन्दर। मुन्नी करती ऊँ -ऊँ ,ऊँ ऊँ, पिल्ला करता पूँ, पूँ, पूँ, पूँ। लेकिन माँ ने उन्हें न छोड़ा, उसको दया न आई थोडा। तब मुन्नी बोली यों रोकर, पिल्ले को तो कर दो बाहर।