मोहब्बत सोज़ भी है साज़ भी है ख़ामोशी भी है आवाज़ भी है नशेमन के लिये बेताब ताईर वहाँ पाबन्दी-ए-परवाज़ भी है ख़ामोशी पे भरोसा करने वालो ख़ामोशी ग़म का गम्माज़ भी है मेरी ख़ामोशि-ए-दिल पर न जाओ कि इस में रूह की आवाज़ भी है दिल-ए-बेगाना-ख़ूँ, दुनिया में तेरा कोई हमदम कोई हमराज़ भी है है मेराज-ए-ख़िरद भी अर्श-ए-अज़ीम जुनूँ का फ़र्श-ए-पा अंदाज़ भी है