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मेरी स्त्री - रघुवीर सहाय

प्यारे दर्शको, यह जो स्त्री आप देखते हैं सो मेरी स्त्री है इसकी मुझसे प्रीति है । पर यह भी मेरे लिए एक विडम्बना है क्योंकि मुझे इसकी प्रीति इतनी प्यारी नहीं जितनी यह मानती है कि है । यह सुंदर है मनोहारी नहीं, मधुर है, पर मतवाली नहीं, फुर्तीली है, पर चपला नहीं और बुद्धिमती है पर चंचला नहीं । देखो यही मेरी स्त्री है और इसी के संग मेरा इतना जीवन बीता
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