मेरे हक में हो हर फैसला जुरुरी तो नहीं
मेरी खिड़की पे हो घोंसला जुरुरी तो नहीं।
हँसते ही कटेगी जिंदगी ज्योत्सना के संग
हर रिश्ते में हो मसला जुरुरी तो नहीं।
आज़ हर बात तुम्हारी बिला शर्त मानूँगा
हर नहले पे हो दहला जुरुरी तो नहीं।
कभी कभी तो कंधा दे दिया करो अपना
हर वक्त ही हो हौसला जुरुरी तो नहीं।
होंगे मुझसे पहले भी तो तुम्हें चाहने वाले
हो जाऊँ इश्क मैं पहला जुरुरी तो नहीं।