
मेरा चंचल मन भी कैसा, पल में खिलता, मुरझा जाता!
जब सुखी हुआ सुख से विह्वल, जब दु:खी हुआ दु:ख से बेकल,
वह हरसिंगार के फूलों सा सुकुमार सहज कुम्हला जाता!
फूला न समाता खुश होकर, या घर भर देता रो-रोकर,
या तो कहता, 'दुनिया मेर
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