मौज - जानकीवल्लभ शास्त्री's image
713K

मौज - जानकीवल्लभ शास्त्री

सब अपनी-अपनी कहते हैं! कोई न किसी की सुनता है, नाहक कोई सिर धुनता है, दिल बहलाने को चल फिर कर, फिर सब अपने में रहते हैं! सबके सिर पर है भार प्रचुर सब का हारा बे
Read More! Earn More! Learn More!