संकित हिय सों पिय-अंकित संदेशो बाँच्यो, आई हाथ थाती-सी ’सनेही’ प्रेम-पन की । नीलम अधर लाल ह्वैके दमकन लागे, खिंच गई मधु-रेखा मधुर हँसन की ।। स्याम-घन-सुरति सुरस बरसन लागे, बारें आँस-मोती आस पूरी अँखियन की । माथ सों छुवाती सियराती लाय-लाय छाती, पाती आगमन की बुझाती आग मन की ।।