रुक गयी नाव जिस ठौर स्वयं, माझी, उसको मझधार न कह ! कायर जो बैठे आह भरे तूफानों की परवाह करे हाँ, तट तक जो पहुँचा न सका, चाहे तू उसको ज्वार न कह ! कोई तम को कह भ्रम, सपना ढूँढे, आलोक-लोक अपना, तव सिन्धु पार जाने वाले को, निष्ठुर, तू बेकार न कह !