
मैं विद्युत् में तुम्हें निहारूँ
नील गगन में पंख पसारूँ;
दुःख है, तुमसे बिछड़ गया हूँ
किन्तु तुम्हारी सुधि न बिसारूँ!
उलझन में दुःख में वियोग में
अब तुम याद बहुत आती हो;
घनी घटा में तुमको खोजूँ
मैं विद्युत् में तुम्हें निहारूँ;
जब से बिछुड़े हैं हम दोनों
मति-गति मेरी बदल गई ह
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