
मैं सोचता नहीं तुम कहाँ होगी
दफ्न किया जो यहाँ ,यहाँ होगी।
तुम्हारी नज़र तो आसमां पे है
ये जमीं भी किसी का आसमां होगी।
जो दर्द दिया है कर्ज़ सा है वो
ये कहानी किस्तों में बयां होगी।
बाँध दिया गया इक नदी क
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