मैं सोचता नहीं तुम कहाँ होगी
दफ्न किया जो यहाँ ,यहाँ होगी।
तुम्हारी नज़र तो आसमां पे है
ये जमीं भी किसी का आसमां होगी।
जो दर्द दिया है कर्ज़ सा है वो
ये कहानी किस्तों में बयां होगी।
बाँध दिया गया इक नदी को जो
वो बचपन में ही अब जवां होगी।
इस बार मुहब्बत की गयी है
कागजी फूलों का ये बागवां होगी।
ये जो रौनक है , खरीदी गयी है
बिक जाएगी और यूँ फ़ना होगी।
मुहब्बत का सिला मुहब्बत मांगूं
कुछ और नहीं मेरी अना होगी।