मधुर! बादल, और बादल, और बादल - माखनलाल चतुर्वेदी's image
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मधुर! बादल, और बादल, और बादल - माखनलाल चतुर्वेदी

मधुर ! बादल, और बादल, और बादल आ रहे हैं और संदेशा तुम्हारा बह उठा है, ला रहे हैं।। गरज में पुस्र्षार्थ उठता, बरस में कस्र्णा उतरती उग उठी हरीतिमा क्षण-क्षण नया श्रृङ्गर करती बूँद-बूँद मचल उठी हैं, कृषक-बाल लुभा रहे हैं।। नेह! संदेशा तुम्हारा बह उठा है, ला रहे हैं।। तड़ित की तह में समायी मूर्ति दृग झपका उठी है तार-तार कि धार तेर
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