
लब-ए-ख़िरद से यही बार बार निकलेगा
निकालने ही से दिल का ग़ुबार निकलेगा
उगेंगे फूल ख़यालों के रेग-ज़ारों से
ख़िज़ाँ के घर से जुलूस-ए-बहार निकलेगा
कहीं फ़रेब न खाना यही फ़िदा-ए-जाम
ब-वक़्त-ए-कार अजब होश्यार निकलेगा
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