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कोयल - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'

काली कुरूप कोयल क्या राग गा रही है, पंचम के स्वर सुहावन सबको सुना रही है। इसकी रसीली वाणी किसको नहीं सुहाती? कैसे मधुर स्वरों से तन-मन लुभा रही है। इस डाल पर कभी है, उस डाल पर कभी है, फिर कर रसाल-वन में मौजें उडा रही है। सब
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