कितना शोरगुल होता
इस शहर में,
शराब से शबाब तक
सब कुछ बिकता है,
बाजार इस कदर सर चढ़ता है
जज्बातो को भी लोग नीलाम कर देते है,
खुद की शरारतो में लोग इस कदर मशरूफ हैं,
की बगल वालो की जिंदगी जल भी जाये
लोगो के कानो में भनक नहीं पड़ेगी !
दियासलाई हर जेब में मौजूद है,
सिगरेट के साथ जिंदगी सुलगाने के लिए !
बस जान पहचान वाला कोई बचा है
तो वो है मेरी खुद की परेशानियां,
जो हमेशा साथ रहती है !
दूरियाँ सबसे बढ़ चुकी है,
और सबसे दूर अब 'तुम' ही नजर आती हो !
तब लगता है युगल यही अच्छा है
इतना शोर है इस शहर में,
कितना अच्छा है
वार्ना कैसे सुन पाता,
मेरी खुद की आवाज मैं ?
वो वक्त - वक्त था
'हम' थे ,
सलीका था
और जिंदगी थी, शहर में !!
#YugalVani