ख़्वाब की तरह से है याद के तुम आये थे - जगन्नाथ आज़ाद's image
700K

ख़्वाब की तरह से है याद के तुम आये थे - जगन्नाथ आज़ाद

जिस तरह दामन-ए-मश्रिक़ में सहर होती है ज़र्रे ज़र्रे को तजल्ली की ख़बर होती है और जब नूर का सैलाब गुज़र जाता है रात भर एक अंधेरे में बसर होती है कुछ इसी तरह से है याद के तुम आये थे जैसे गुलशन में दबे पाओं बहार आती है पत्ती-पत्ती के लिये लेके निखार आती है और फिर वक़्त वो आता है के
Read More! Earn More! Learn More!