ख़ुदनुमा होके निहाँ छुप के नुमायाँ होना अलग़रज़ हुस्न को रूसवा किसी उनवाँ1 होना यूँ तो अकसीर है ख़ाके-दरे-जानाँ लेकिन काविशे-ग़म2 से उसे गर्दिशे-दौराँ होना हद्दे-तमकीं से न बाहर हुई खु़द्दार निगाह आज तक आ न सका हुस्ने को हैराँ होना चारागर3 दर्द सरापा हूँ मेरे दर्द नहीं बावर आया तुझे नश्तनर का रगे-जाँ होना दफ़्तरे-राज़े-महब्बहत था मलाले-दिल पर वो सुकूते निगहे-नाज़ का पुरसाँ होना सर-बसर बर्के़-फ़ना इश्क़ के जलवे हैं ‍फ़ि‍राक खा़नए-दिल को न आबाद न वीराँ होना