खुद से खुद का सफ़र है रास्ता भी तुमसे हो कर है। कल कोई वारदात न हुई आज़ की ये ताज़ा ख़बर है। बेचैनी घुली सी है हवा में आसपास ही कोई शहर है। कोई परिंदा लाओ कहीं से देखो, उदास इक शजर है। कितना शोर है सन्नाटे में ये किसकी बेचैन नज़र है।