
मैं अछूत हूँ, छूत न मुझमें, फिर क्यों जग ठुकराता है?
छूने में भी पाप मनता, छाया से घबराता है?
मुझे देख नाकें सिकोड़ता, दूर हटा वह जाता है।
'हरिजन' भी कहता है मुझको, हरि से विलग कराता है॥
फिर जब धर्म बदल जाता है, मुसलमान बन जाता हूँ।
अथवा ईसाई बन करके, हैट लगाकर आता हूँ।
छूत-छात तब मिट जाती है, साहब मैं कहलाता हूँ।
उन्हीं मन्दिरों में जा करके, उन्हें पवित्र बनाता हूँ॥
क्या कारण इस परिवर्तन का, ऐ हिंद बतला दे तू?
क्यों न तजूँ इस अधम धर्म को? इसे ज़रा जतला दे तू?
नहीं-नहीं मैं समझ गया, क्या मेरा तेरा नाता है।
तू है मेरा शत्रु पुराना, अपना बैर चुकाता है॥
उत्तर धु्रव से, तिब्बत होकर, तू भारत में घुस
Read More! Earn More! Learn More!
