
लो मैंने कलम को धो डाला
लो मेरी ज़बाँ पर ताला है
लो मैंने आँखें बंद कर लीं
लो परचम सारे बांध लिए
नारों को गले में घोंट दिया
एहसास के ताने बाने को
फिर मैंने हवाले दार किया
इस दिल की कसक को मान लिया
एक आखरी बोसा देना है
और अपने लरज़ते हाथों से
खंजर के हवाले करना है
लो मैंने कलम को धो डाला
लो मेरी ज़बाँ पर ताला है
इलज़ाम ये आयद था मुझ पर
हर लफ्ज़ मेरा एक नश्तर है
जो कुछ भी लिखा, जो कुछ भी कहा
वो देश विरोधी बातें थीं
और हुक्म किया था ये सादिर
तहज़ीब के इस गहवारे को
जो मेरी नज़र से देखेगा
वो एक मुलजि़म कहलायेगा
लो मैंने कलम को धो डाला
लो मेरी ज़बाँ प
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