काश मेरे लिए भी ऐसे लजाता कोई मेरी बातें सिर्फ़ फूलों को बताता कोई। खुली है खिड़की,पर्दा खेंच रक्खा है चाहनेवाले को ऐसे नहीं सताता कोई। चाँद से धीरे धीरे छंट रहा हो बादल इस तरह घूँघट नहीं हटाता कोई। सब सुनना चाहते हैं औरों की यहाँ हकीकत अपनी नहीं बताता कोई। इश्क से इश्क है तो बस इश्क करो इश्क में अहसान नहीं जताता कोई।