कर के मुँह काला अंधेरों का उजालों से बात की जाये छोड़ मोह मोबाईल का कुछ घरवालों से बात की जाये जवाब, जवाब और बस जवाब माँगते हैं सब बात बात पे छोड़ जवाबों की परवाह कुछ अब सवालों से बात की जाये आ गये हम छोड़ कर वो गलियाँ पेट की ख़ातिर यहाँ चलों चलें फिर गाँव वहाँ घर में पड़े जालों से बात की जाये घूम रहे जहाज़ में, माल में, बंद कमरों में बैठे खाते ठंडी हवा निकला जाये आज पहाड़ों पर नदी नालों से बात की जाये देखने छोड़ दिये ख़्वाब हममें कि पूरे तो होते नहीं हैं वो शुरू करें देखना ख़्वाब कुछ हँसी ख़यालों से बात की जाये प्यार मोहब्बत तो जैसे हमने कब का छोड़ दिया यूँ हीं ढूँढा जाये किताबों में गुलाब, ख़ुशबूदार रूमालों से बात की जाये कर के मुँह काला अंधेरों का उजालों से बात की जाये छोड़ मोह मोबाईल का कुछ घरवालों से बात की जाये