कब तक यूं बहारों में पतझड़ का चलन होगा? कलियों की चिता होगी, फूलों का हवन होगा हर धर्म की रामायण युग-युग से ये कहती है सोने का हरिण लोगे, सीता का हरण होगा जब प्यार किसी दिल का पूजा में बदल जाए हर पल आरती होगी, हर शब्द भजन होगा जीने की कला हम ने सीखी है शहीदों से होठों पे ग़ज़ल होगी जब सिर पे कफन होगा इस रूप की बस्ती में क्या माल खरीदोगे? पत्थर के हृदय होंगे, फूलों का बदन होगा यमुना के किनारे पर जो दीप भी जलता है वो और नही कुछ भी, राधा का नयन होगा जीवन के अँधेरे में हिम्मत न कभी हारो हर रात की मुट्ठी में सूरज का रतन होगा सत्ता के लिए जिन का ईमान बिकाऊ है उन के ही गुनाहों से भारत का पतन होगा मज़दूर के माथे का कहता है पसीना भी महलों में प्रलय होगी, कुटिया में जशन होगा इस देश की लक्ष्मी को लूटेगा कोई कैसे? जब शत्रु की छाती पर अंगद का चरण होगा विज्ञान के भक्तों को अब कौन ये समझाए वरदानों से अपने ही दशरथ का मरण होगा कहना है सितारों का, अब दूर नहीं वो दिन कुछ ऊँची धरा होगी, कुछ नीचे गगन होगा इन्सान की सूरत में जब भेडिये फिरते हों फिर 'हंस' कहो कैसे दुनिया में अमन होगा?