
जो गुज़री मुझ पे मत उस से कहो हुआ सो हुआ
बला-कशान-ए-मोहब्बत पे जो हुआ सो हुआ
मबादा हो कोई ज़ालिम तिरा गरेबाँ-गीर
मिरे लहू को तू दामन से धो हुआ सो हुआ
पहुँच चुका है सर-ए-ज़ख़्म दिल तलक यारो
कोई सुबू कोई मरहम रखो हुआ सो हुआ
कहे है सुन के मिरी सरगुज़िश्त वो बे-रहम
ये कौन ज़िक्र है जाने भी दो हुआ सो हुआ
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