
जो बात मेरे कान में ख़्वाबो ने कही है
वो बात हमेशा ही ग़लत हो के रही है ।
जो चाहो लिखो नाम मेरे सब है मुनासिब
उनकी ही अदालत है यहाँ, जिनकी बही है ।
टपका जो लहू पाँव से मेरे तो वो चीख़े
कल जेल से भागा था जो मुजरिम वो वही है ।
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