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ज्ञान-ध्यान कुछ काम न आए - बालस्वरूप राही

ज्ञान ध्यान कुछ काम न आए हम तो जीवन-भर अकुलाए । पथ निहारते दृग पथराए हर आहट पर मन भरमाए । झूठे जग में सच्चे सुख की क्या तो कोई आस लगाए । देवालय हो या मदिरालय जहाँ गए जाकर पछताए । तड़क-भड़क संतो की ऐसी दुनियादार देख शरमाए । माल लूट का सबने बाँटा हम ही पड़े रहें अलसाए । जो बिक जाता धन्य वही है जो न
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