हे बाल! तू हो ना निराश
तुझको ही तो चलना है,आगे फिर से बढ़ना है|
पहले भी तू यह कर चुका है,हिम्मत से ही चल सका है||
जब तू आया धरती पर,माँ-बाप ने चलना सिखाया है,
भाई-बहन के साथ ही,गुरु ने मार्ग दिखाया है।।
मित्रों का है बड़ा योगदान,जिसने साहस को बढ़ाया है।।
हे बाल! तू हो ना निराश
तुझको ही तो चलना है,आगे फिर से बढ़ना है।।
माना की पथ है दुर्गम,पर तुझमें भी तो है वह दम,
जो जा सके और पा सके,अपने सपनों का मंजर।।
फिर देर न कर तू सोच में,बस चलता जा तू बढ़ता जा।
फिर मिलेगी तुझको मंजिल भी और मिलेगी उसकी रौनक भी।।
बस इतना ही तू जान ले,बस इतना ही तू मान ले।
तुझको ही तो चलना है,आगे फिर से बढ़ना है।।