
जागू जागू हो ब्रजराज ।
निशि पति मेला मलिन देखि निशि त्यागल अम्बर लाज ॥
तारागण सब छोड़ि पड़ैलिह, सखिक आचरण जानि ।
अपनो लोक संग त्यागै ए, अति अनीति अनुमानि ॥
प्राची दिशा भेट केर कारण, ऐली उषा सोहागिनि ।
पहिरि लाल प
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