
निरखो नयान ज्ञान के खोल,
प्रभु की ज्योति जगमगाती है।
देखो, दमक रही सब ठौर, चमके नहीं कहीं कुछ और,
प्यारी हमस ब की सिरमौर, उज्ज्वल अंकुर उपजाती है।
जिसने त्यागे विषय-विकार, मन में धारे विमल विचार,
समझा सदुपदेश का सा
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