जब तुम और मै,
हम न हों,
तो बस एक बाद याद रखना
मेरी कहानी जिससे भी बताना
उसको मेरी शुरुआत जरूर दिखाना
बुराई सबको बताना
मगर कभी अच्छाई भी मत छिपाना
मेरा बार बार बड़ी ऊंचाइयों से गिरना बताना
मगर छोटी छोटी उचाईयों पर चढ़ना भी कभी मत छिपाना
बताना कितना झूठा था
कितना पागल था
कितना नाकारा था
और कितना मतलबी था, मै
सब की सब गलतियां जरूर गिनाना
उन्हें बताना
मेरी चाय की चुस्कियां
शराब की घूँटें
दिन और रात का कौतुहल
इश्क में पागल होना
मेरा दिन बताना
मेरी रात बताना
बताना मेरे लफ्ज कितने चुभते थे
तुम्हे !
मगर अंत में ये जरूर बताना -
आखिरी में कितना चुप था मै
बस तुम और ग़लत फहमियाँ बोलती चली गयी !!