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इतिहास पढ़ के देखो (ख्याल) - अछूतानन्दजी 'हरिहर'

हरेक नेशन उठी है यों ही ज़रा तो इतिहास, पढ़ के देखो। न मानो गर तो ये आर्य जाती का वेद ही खास, पढ़ के देखो। इस हिन्द में जब ये आई चलकर, तो डाकू वहशी से कम नहीं थी। तमीज़ ही थी, न मालो दौलत थी उसके पास, पढ़ के देखो॥ मगर है होनी ने ज़ोर मारा, भटकती आ हिन्द में आ पहुँची। तो हिन्द सोने की सरज़मीं में, किया था जब बास, पढ़ के देखो॥
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