हरेक नेशन उठी है यों ही ज़रा तो इतिहास, पढ़ के देखो। न मानो गर तो ये आर्य जाती का वेद ही खास, पढ़ के देखो। इस हिन्द में जब ये आई चलकर, तो डाकू वहशी से कम नहीं थी। तमीज़ ही थी, न मालो दौलत थी उसके पास, पढ़ के देखो॥ मगर है होनी ने ज़ोर मारा, भटकती आ हिन्द में आ पहुँची। तो हिन्द सोने की सरज़मीं में, किया था जब बास, पढ़ के देखो॥ मगर थे हम हिन्द में तो अफजल, किले हमारे थे सौ-सौ यहाँ पर। लड़े भी हम, पर हमारा छल से, गया था हो नास, पढ़ के देखो॥ हमारे पुरखे थे सीधे-सच्चे, न जानते थे कपट व छल को। इसीसे दक्षिण से हट गये वे, ये शोक-उच्छ्वास, पढ़ के देखो॥ बचे जो जकड़े गये वही फिर गुलामी करने को आर्यों की। वही है 'हरिहर' हमारे नेशन बनी जोयों दास, पढ़ के देखो॥