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इतिहास-ज्ञान - अछूतानन्दजी 'हरिहर'

आये थे अब आर्य हिन्द में, तिब्बत का स्थान, रहती यहाँ सदा से थी इक जाती सभ्य महान। जिनके थे सैकड़ों किले पाषाणों के मजबूत, उनको कहे असभ्य नीच जो वह है पूरा ऊत। शंवर कुयब कृष्ण विश्वक थे महावीर बलवान, कंपित होते आर्य नाम सुन, छिप जाते भय मान। सौ-सौ किले सुदृढ़ पत्थर के, दुर्जय सैन्य अपार, कौन जीत सकता था उनको, मन से जाते हार। हिरनकशिपु बलि और विरोचन महाप्रतापी वीर, वैदिक देव काँपते थर-थर, छूट गया था धीर। तब षड़य
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