इतिहास और प्रतिइतिहास - नरेश मेहता's image
711K

इतिहास और प्रतिइतिहास - नरेश मेहता

राम : क्या यही है मनुष्य का प्रारब्ध ? कि कर्म निर्मम कर्म केवल असंग कर्म करता ही चला जाए ? भले ही वह कर्म धारदार अस्त्र की भांति न केवल देह बल्कि उसके व्यकित्व को रागात्मिकताओं को भी काट कर रख दे। क्या यही है मनुष्य का प्रारब्ध ?? क्या इसीलिए मनुष्य देश और काल की विपरीत चुम्बताओं में जीवन भर एक प्रत्यंचा सा तना हुआ कर्म के बाणों को वहन करने के लिए पात्र या अपात्र दिशा या अदिशा में सन्धान करने के लिए केवल साधन है ? मनुष्य क्या केवल साधन है ? क्या केवल माध्मय है ?? लेकिन किसका ? कौन है
Read More! Earn More! Learn More!