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इसका रोना - सुभद्राकुमारी चौहान

तुम कहते हो - मुझको इसका रोना नहीं सुहाता है | मैं कहती हूँ - इस रोने से अनुपम सुख छा जाता है || सच कहती हूँ, इस रोने की छवि को जरा निहारोगे | बड़ी-बड़ी आँसू की बूँदों पर मुक्तावली वारोगे || 1 || ये नन्हे से होंठ और यह लम्बी-सी सिसकी देखो | यह छोटा सा गला और यह गहरी-सी हिचकी देखो || कैसी करुणा-जनक दृष्टि है, हृदय उमड़ कर आया है | छिपे हुए आत्मीय भाव को यह उभार कर लाया है || 2 || हँसी बाहरी, चहल-पहल को ही बहुधा दरसाती है | पर रोने में अंतर तम तक की हलचल मच जाती है || जिससे सोई ह
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