
हिन्दू हैं बुत-परस्त मुसलमाँ ख़ुदा-परस्त
पूजूँ मैं उस किसी को जो हो आश्ना-परस्त
इस दौर में गई है मुरव्वत की आँख फूट
मादूम है जहान से चश्म-ए-हया-परस्त
देखा है जब से रंग-ए-कफ़क तेरे पाँव में
आतिश को छोड़ गब्र हुए हैं हिना-परस्त
चाहे कि अक्स-ए-दोस्त रहे तुझ Read More! Earn More! Learn More!
