हरी मिरचियाँ जिंदाबाद! सबके मन को ललचाती, बिकतीं एक कतार में, लेने वाले लोग खड़े इतवारी बाजार में! नई तुरइयाँ जिंदाबाद! बड़े मजे से देखो तो- रोज तराजू पर चढ़तीं, मच जाती है ठेलम-ठेल! सँभल न पातीं गिर पड़तीं! प्यारी छुइयाँ जिंदाबाद!