धूल कितने रंग बदले डोर और पतंग बदले जब तलक जिंदा कलम है हम तुम्हें मरने न देंगे खो दिया हमने तुम्हें तो पास अपने क्या रहेगा कौन फिर बारूद से सन्देश चन्दन का कहेगा मृत्यु तो नूतन जनम है हम तुम्हें मरने न देंगे। तुम गए जब से न सोई एक पल गंगा तुम्हारी बाग में निकली न फिर हस्ते गुलाबों की सवारी हर किसी की आँख नम है हम तुम्हें मरने न देंगे तुम बताते थे कि अमृत से बड़ा है हर पसीना आँसुओं से ज्यादा कीमती है न कोई नगीना याद हरदम वह कसम है हम तुम्हें मरने न देंगे तुम नहीं थे व्यक्ति तुम आजादियों के कारवाँ थे अमन के तुम रहनुमा थे प्यार के तुम पासवाँ थे यह हकीकत है न भ्रम है हम तुम्हें मरने न देंगे तुम लड़कपन के लड़कपन तुम जवानो की जवानी सिर्फ दिल्ली ही न हर दिल था तुम्हारी राजधानी प्यार वह अब भी न कम है हम तुम्हें मरने न देंगे बोलते थे तुम न तुममें बोलता था देश सारा बस नहीं इतिहास ही तुमने हवाओं को सवाँरा आज फिर धरती नरम है हम तुम्हें मरने न देंगे