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हम तुम्हें मरने न देंगे - गोपालदास "नीरज"

धूल कितने रंग बदले डोर और पतंग बदले जब तलक जिंदा कलम है हम तुम्हें मरने न देंगे खो दिया हमने तुम्हें तो पास अपने क्या रहेगा कौन फिर बारूद से सन्देश चन्दन का कहेगा मृत्यु तो नूतन जनम है हम तुम्हें मरने न देंगे। तुम गए जब से न सोई एक पल गंगा तुम्हारी बाग में निकली न फिर हस्ते गुलाबों की सवारी हर किसी की आँख नम है हम तुम्हें मरने न देंगे तुम बताते थे कि अमृत से बड़ा है हर पसीना आँसुओं से ज्यादा कीमती है न कोई नगीना याद हरदम
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