घहरि घहरि घन सघन चहुँधा घेरि , छहरि छहरि विष बूँद बरसावै ना. द्विजदेव की सौं अब चूक मत दाँव, एरे पातकी पपीहा!तू पिया की धुनि गावै ना. फेरि एसो औसर न ऐहै तेरे हाथ,एरे, मटकि मटकि मोर सोर तू मचावै ना. हौं तौ बिन प्रान,प्रान चाहत तजोई अब, कत नभ चन्द तू अकास चढि धावै ना.