
ग़म से बहल रहे हैं आप आप बहुत अजीब हैं
दर्द में ढल रहे हैं आप आप बहुत अजीब हैं
साया-ए-वस्ल कब से है आप का मुंतज़िर मगर
हिज्र में जल रहे हैं आप आप बहुत अजीब हैं
अपने ख़िलाफ़ फ़ैसला ख़ुद ही लिखा है आप ने
हाथ भी मल रहे हैं आप आप बहुत अजीब हैं
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