सेर भर सोने को हजार मन कण्डे में खाक कर छोटू वैद्य रस जो बनाते हैं । लाल उसे खाते तो यम को लजाते और बूढ़े उसे खाते देव बन जाते हैं । रस है या स्वर्ग का विमान है या पुष्प रथ खाने में देर नहीं, स्वर्ग ही सिधाते हैं । सुलभ हुआ है खैरागढ़ में स्वर्गवास और लूट घन छोटू वैद्य सुयश कमाते हैं ।